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Story from bad student to NEET aspirants

Story from bad student to neet aspirant

Story from bad student to neet aspirant

Jan 27, 2026

कहानी की शुरुआत डिस्क्रिप्शन में लिखि है उसके बाद यहां से चालू करें ।।।।सबको पता होगा दुनिया कितना भी कह ले सरकारी स्कूल सरकारी ही रहता है फैसिलिटी के मामलेम नहीं कह रहा हूं वहां के बच्चे वहां का महौल तो मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ क्योंकि आपको पता है कई पढ़ने वाले बच्चे होते हैं जो दोस्ती नहीं करना चाहते हैं तो मुझे बहुत अकेला फील होता था क्योंकि मैं प्राइवेट स्कूल मैं दोस्त बनाया करता था  इसलिए मैं दोस्ती पर विश्वास रखता था लेकिन पढ़ने वाले बच्चे मुझे दोस्ती नहीं करते थे मैं तो मतलब नहीं रहा पढ़ने वाला 1 साल घर पर बैठने के बाद और फिर सीधा सरकारी मे अब हमको जो पता है कि मतलब ग्रुप कैसे बनते हैं ह****( खराब) बच्चों के लड़ाई वालों के तो  हमको यह पता नहीं होता उस उम्र में तो मुझे तो बस दोस्ती करनी थी अकेले पन की वजह से तो जो भी मेरे दोस्त बने उनमें कुछ बहुत गाली देते थे उन्हीं के साथ रहते रहते मैं भी गाली वगैरह देना शुरू कर दिया कुछ सालों में क्योंकि एक बच्चा कितना ही रोक सकता है अपने आप को एक समय के बाद बिगड़ ही जाते है जैसी संगत वैसे बन जाते हैं लोग फिर मैंने क्रिकेट अकादमी ज्वाइन करी स्कूल मैं भी लंच मे क्रिकेट और कैच एम कैच खेला करते थे स्कूल से आते ही मैं एकेडमी चला जाता था क्योंकि उस स्कूल में सिर्फ ऐसे ही पोस्टर लगे हए थे तो कैसे मैं खेलता था उसके बाद क्या करता था 
स्कूल मे और क्या करता था मेरी पढ़ाई का क्या हुआ वह अगले एपिसोड में।
strugglestruggle126
Piyush sharma

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यह कहानी शुरू होती है । मेरे बचपन से। मेरा बचपन से सपना रहा है पहला या तो क्रिकेटर बनूंगा या डॉक्टर या पायलट मेरी पूरी जो पढ़ाई है नर्सरी से लेकर थर्ड तक एक पब्लिक प्राइवेट स्कूल में हुई है उसके बाद दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण हुआ था 2016 में जिसकी वजह से लगभग सारे स्कूल दिल्ली में बंद कर दिए गए थे वही समय था जब
मेरी पढ़ाई छूटी 1 साल घर पर पड़ा रहा फिर हमारे इधर बहुत सारे नए सरकारी स्कूल खुले लग गए जिसको लोग कह रहे थे सरकारों ने खोला है यह इन बेकार सरकारी स्कूलों की तरह नहीं है इनमें लड़ाई नहीं होती पढ़ाई होती है टीचर्स भी अच्छे हैं तो यह सब मामला चलने के बाद घर वालों ने मुझे कहा कि बेटा इसमें एडमिशन करवा लूं चलो देखने चलते हैं स्कूल बट मेरी पहली ज़िद वही की मम्मी और पापा अब मुझे एकेडमी जाना है क्रिकेट के लिए जब मैं स्कूल गया तो वहां बहुत सारे खेल के चित्र लगे हुए थे मम्मी पापा ने कहा बेटा यहां पर क्रिकेट भी खिलाते हैं प्राइवेट स्कूल में तो खिलाएंगे भी नहीं अब मैं रहा बच्चा मैंने करवा लिया एडमिशन फोर्थ कक्षा मैं नहीं पड़ी उम्र के हिसाब से उन्होंने बोला पांचवी में एडमिशन मिलेगा मैं एडमिशन लेने के बाद 1 साल पढ़ने के बाद सरकारी स्कूल था इतना कुछ खास नहीं था पढ़ाई लिखाई में तो मेरा हो गया पढ़ाई से रिश्ता खत्म क्योंकि 1 साल घर पर बैठे हो गए थे और सीधा सरकारी स्कूल में फिर बिल्कुल बदल गया। कैसा हो गया मैं यह जानेंगे अगले पार्ट में। एक प्राइवेट स्कूल में अच्छा स्टूडेंट होने के बाद इतना ज्यादा बदल गया में। क्यों और कैसे।
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